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वृषभ राशिफल आज का — चंद्र राशि वृषभ

वृषभ राशिफल — 30° से 60° निरयन तक की चंद्र राशि। शुक्र स्वामी, चंद्रमा 3 अंश पर उच्च। कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा के पाद सहित।

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वृषभ राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 30° से 60° निरयन के बीच था। वृषभ का स्वामी शुक्र है, और चंद्रमा स्वयं यहाँ 3 अंश पर उच्च का होता है — बारह राशियों में केवल वृषभ में चंद्रमा अपने उच्च स्थान पर बैठता है।

राशि स्वामी
शुक्र
तत्व
पृथ्वी
निरयन विस्तार
30°00′ – 60°00′

वृषभ चंद्र की सबसे बड़ी संरचनात्मक बात यही है कि यहाँ मन का कारक अपने शिखर पर है। जिस राशि में चंद्रमा उच्च का हो, उसमें जन्मा मन स्थिर होता है — शीघ्र विचलित नहीं होता, और जो एक बार बैठ गया वह आसानी से नहीं उठता। यही स्थिरता वृषभ की शक्ति है और उसका सबसे महँगा स्वभाव भी।

वृषभ स्थिर (fixed) राशि है और पृथ्वी तत्व की। स्थिर राशियों का नवांश नवें स्थान से आरंभ होता है, इसलिए वृषभ के नौ पाद नवांश में मकर से आरंभ होकर कन्या तक जाते हैं — शनि की राशि से आरंभ। मन उच्च का शुक्र-गृह में, पर नवांश का आरंभ शनि से: यही वृषभ का वह अंतर्विरोध है जिसे लोग "जिद" कहते हैं और शास्त्र स्थिरता कहता है।

वृषभ में रोहिणी पूरी आती है, और रोहिणी चंद्रमा का ही नक्षत्र है। अर्थात् वृषभ के मध्य के चार पाद ऐसे हैं जहाँ राशि-स्वामी शुक्र और नक्षत्र-स्वामी चंद्रमा दोनों सौम्य ग्रह हैं और चंद्रमा उच्च का भी। ज्योतिष में इसे ही रोहिणी का विशेष बल कहा गया है, और यह वृषभ के अलावा किसी राशि को उपलब्ध नहीं।

इस राशि के नौ पाद — नक्षत्र, अंश और नवांश

नक्षत्र पाद सायन अंश नक्षत्र स्वामी नवांश
कृत्तिका230°00′ – 33°20′सूर्यमकर
कृत्तिका333°20′ – 36°40′सूर्यकुम्भ
कृत्तिका436°40′ – 40°00′सूर्यमीन
रोहिणी140°00′ – 43°20′चंद्रमेष
रोहिणी243°20′ – 46°40′चंद्रवृषभ
रोहिणी346°40′ – 50°00′चंद्रमिथुन
रोहिणी450°00′ – 53°20′चंद्रकर्क
मृगशिरा153°20′ – 56°40′मंगलसिंह
मृगशिरा256°40′ – 60°00′मंगलकन्या

इस राशि से बारह भाव — राशि और भावेश

भाव राशि राशि स्वामी किसका भाव
1वृषभशुक्रतन, स्वभाव, देह
2मिथुनबुधधन, कुटुम्ब, वाणी
3कर्कचंद्रपराक्रम, भाई-बहन, साहस
4सिंहसूर्यसुख, माता, घर
5कन्याबुधविद्या, संतान, बुद्धि
6तुलाशुक्ररोग, ऋण, शत्रु
7वृश्चिकमंगलदाम्पत्य, साझेदारी
8धनुगुरुआयु, गुप्त, आकस्मिक
9मकरशनिभाग्य, धर्म, पिता
10कुम्भशनिकर्म, प्रतिष्ठा
11मीनगुरुलाभ, इच्छा-पूर्ति
12मेषमंगलव्यय, विदेश, मोक्ष

किस ग्रह के पास कौन-से भाव

ग्रहभाव
सूर्य4
चंद्र3
मंगल7 · 12
बुध2 · 5
गुरु8 · 11
शुक्र1 · 6
शनि9 · 10

योगकारक ग्रह: शनि — 9 · 10

वृषभ से नवम और दशम — भाग्य और कर्म — दोनों शनि के पास हैं, और यही वृषभ के योगकारक होने का अर्थ है: एक ग्रह जो केंद्र और त्रिकोण दोनों जोड़ता है, बारह में केवल छह राशियों को मिलता है। बुध के पास दूसरा और पाँचवाँ, यानी धन और बुद्धि एक ही स्वामी के; शुक्र स्वयं लग्न और षष्ठ दोनों का स्वामी है, इसलिए सुख और रोग एक ही धुरी पर आते हैं।

वृषभ में चंद्रमा 3 अंश पर उच्च होता है, और वह बिंदु कृत्तिका के दूसरे पाद में पड़ता है — जिसका स्वामी सूर्य है। अर्थात् मन अपने शिखर पर उस पाद में बैठता है जिसका नियंत्रण आत्मा के कारक के हाथ है। वृषभ में किसी ग्रह का नीच बिंदु नहीं है; यहाँ केवल उच्च का बिंदु है।

रोहिणी के चारों पाद वृषभ में हैं, इसलिए यहाँ जन्मी सबसे बड़ी संख्या चंद्र की दस-वर्षीय महादशा से आरंभ करती है। कृत्तिका के तीन पाद सूर्य की छह-वर्षीय दशा देते हैं और मृगशिरा के दो मंगल की सात-वर्षीय। कन्या और मकर का आरंभ-क्रम भी यही है।

इस राशि के नक्षत्र — गण, योनि और नाड़ी

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी गण योनि नाड़ी
कृत्तिकासूर्यराक्षसमेषअन्त्य
रोहिणीचंद्रमनुष्यसर्पअन्त्य
मृगशिरामंगलदेवसर्पमध्य

इस राशि में किस ग्रह का उच्च या नीच

ग्रह स्थिति राशि में अंश कौन-से पाद में
चंद्रउच्च3°00′कृत्तिका पाद 2 · सूर्य

इस राशि में जन्म से कौन-सी महादशा पहले चलती है

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी महादशा वर्ष राशि का भाग
कृत्तिकासूर्य6 वर्ष3/9 · 10°00′
रोहिणीचंद्र10 वर्ष4/9 · 13°20′
मृगशिरामंगल7 वर्ष2/9 · 6°40′

यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: कन्या · मकर

कार्य और करियर

शुक्र — राशि स्वामी

शुक्र कर्म का नहीं, मूल्य का कारक है। वृषभ चंद्र काम को गति से नहीं, गुणवत्ता से नापता है — इसलिए जल्दबाज़ी वाले कार्यक्षेत्र में यह राशि थकती है और दीर्घकालिक निर्माण में सबसे अच्छा प्रदर्शन करती है।

धन और व्यय

बुध — वृषभ से द्वितीयेश (मिथुन)

वृषभ से दूसरा भाव मिथुन है, बुध का। धन का प्रश्न वृषभ चंद्र के लिए संचय का नहीं, हिसाब का है — आय प्रायः एक से अधिक स्रोतों से आती है, और गड़बड़ी तब होती है जब हिसाब कई जगह बँट जाता है।

संबंध

मंगल — वृषभ से सप्तमेश (वृश्चिक)

वृषभ से सातवाँ भाव वृश्चिक है — मंगल की जल राशि, जहाँ चंद्रमा नीच का होता है। जिस राशि में मन उच्च का है, उसके ठीक सामने वह नीच का है; संबंधों में वृषभ चंद्र की सबसे बड़ी परीक्षा यही ध्रुवीयता है।

स्वास्थ्य

शुक्र और वृषभ का कंठ-स्थान

कालपुरुष में वृषभ कंठ का स्थान है। वृषभ चंद्र में दबाव सबसे पहले गले पर उतरता है — स्वर बैठना, थायरॉइड, गले का संक्रमण। यह इस राशि का विशिष्ट संकेत है, सामान्य स्वास्थ्य-सलाह नहीं।

यह पृष्ठ आपको क्या नहीं बता सकता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृषभ में चंद्रमा उच्च का क्यों माना जाता है?

शास्त्रीय मत के अनुसार चंद्रमा वृषभ के 3 अंश पर परम उच्च है। कारण यह बताया जाता है कि वृषभ पृथ्वी तत्व की स्थिर राशि है और चंद्रमा का चंचल स्वभाव यहाँ स्थिरता पाता है — जल को पात्र मिल जाता है।

वृषभ राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

कृत्तिका के दूसरे से चौथे पाद, रोहिणी के चारों पाद, और मृगशिरा के पहले दो पाद — कुल नौ। कृत्तिका का पहला पाद मेष में और मृगशिरा के अंतिम दो पाद मिथुन में पड़ते हैं।

क्या वृषभ राशि वाले जिद्दी होते हैं?

स्थिर राशि और उच्च का चंद्रमा — दोनों स्थिरता देते हैं। वह स्थिरता जिद बनेगी या धैर्य, यह चंद्रमा किस भाव में है और उस पर किसकी दृष्टि है, इससे तय होता है। राशि अकेले यह नहीं बताती।

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