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मिथुन राशिफल आज का — चंद्र राशि मिथुन

मिथुन राशिफल — 60° से 90° निरयन तक की चंद्र राशि। बुध स्वामी, द्विस्वभाव वायु राशि। मृगशिरा, आर्द्रा और पुनर्वसु के पाद सहित।

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मिथुन राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 60° से 90° निरयन के बीच था। मिथुन का स्वामी बुध है और यह द्विस्वभाव वायु राशि है — इसमें कोई ग्रह न उच्च का होता है, न नीच का, और यह विशेषता बारह में केवल चार राशियों की है।

राशि स्वामी
बुध
तत्व
वायु
निरयन विस्तार
60°00′ – 90°00′

मिथुन की पहचान यही है कि यहाँ कोई ग्रह अपने चरम पर नहीं बैठता। जिन राशियों में उच्च या नीच का बिंदु होता है, उनका स्वभाव उस बिंदु के चारों ओर बनता है; मिथुन में ऐसा कोई केंद्र नहीं है। इसलिए मिथुन चंद्र का मन किसी एक दिशा में बँधा नहीं होता — यह उसकी विस्तार-क्षमता है और उसकी अस्थिरता भी।

मिथुन द्विस्वभाव (dual) राशि है, इसलिए इसका नवांश क्रम पाँचवें स्थान से आरंभ होता है — तुला से। मिथुन के नौ पाद नवांश में तुला से आरंभ होकर मिथुन पर समाप्त होते हैं, अर्थात् वायु से आरंभ और वायु पर अंत। बारह राशियों में यह पूर्ण वायु-वृत्त केवल मिथुन को मिलता है।

मिथुन में आर्द्रा पूरी आती है, और आर्द्रा का स्वामी राहु है। इसका अर्थ यह कि मिथुन के मध्य चार पाद ऐसे हैं जहाँ राशि-स्वामी बुध है और नक्षत्र-स्वामी राहु — बुद्धि और छाया-ग्रह का यह मेल मिथुन के अतिरिक्त और कहीं इस रूप में नहीं आता, और यही आर्द्रा की तीव्रता का शास्त्रीय आधार है।

इस राशि के नौ पाद — नक्षत्र, अंश और नवांश

नक्षत्र पाद सायन अंश नक्षत्र स्वामी नवांश
मृगशिरा360°00′ – 63°20′मंगलतुला
मृगशिरा463°20′ – 66°40′मंगलवृश्चिक
आर्द्रा166°40′ – 70°00′राहुधनु
आर्द्रा270°00′ – 73°20′राहुमकर
आर्द्रा373°20′ – 76°40′राहुकुम्भ
आर्द्रा476°40′ – 80°00′राहुमीन
पुनर्वसु180°00′ – 83°20′गुरुमेष
पुनर्वसु283°20′ – 86°40′गुरुवृषभ
पुनर्वसु386°40′ – 90°00′गुरुमिथुन

इस राशि से बारह भाव — राशि और भावेश

भाव राशि राशि स्वामी किसका भाव
1मिथुनबुधतन, स्वभाव, देह
2कर्कचंद्रधन, कुटुम्ब, वाणी
3सिंहसूर्यपराक्रम, भाई-बहन, साहस
4कन्याबुधसुख, माता, घर
5तुलाशुक्रविद्या, संतान, बुद्धि
6वृश्चिकमंगलरोग, ऋण, शत्रु
7धनुगुरुदाम्पत्य, साझेदारी
8मकरशनिआयु, गुप्त, आकस्मिक
9कुम्भशनिभाग्य, धर्म, पिता
10मीनगुरुकर्म, प्रतिष्ठा
11मेषमंगललाभ, इच्छा-पूर्ति
12वृषभशुक्रव्यय, विदेश, मोक्ष

किस ग्रह के पास कौन-से भाव

ग्रहभाव
सूर्य3
चंद्र2
मंगल6 · 11
बुध1 · 4
गुरु7 · 10
शुक्र5 · 12
शनि8 · 9

मिथुन से सातवाँ और दसवाँ दोनों गुरु के पास हैं, पर दोनों केंद्र हैं और त्रिकोण एक भी नहीं; इसी कारण गुरु यहाँ बलवान होकर भी योगकारक नहीं कहलाता। शनि के पास अष्टम और नवम, यानी आयु और भाग्य एक साथ। बुध स्वयं लग्न और चतुर्थ का स्वामी है — बुद्धि और घर, दोनों एक ही ग्रह से।

मिथुन में किसी ग्रह का उच्च या नीच बिंदु नहीं पड़ता — बारह में चार राशियाँ ऐसी हैं, और मिथुन उनमें पहली। इसका व्यावहारिक अर्थ बुध के लिए सबसे बड़ा है: अपनी ही राशि में बैठा बुध यहाँ न शिखर पाता है न तल, इसलिए उसका बल भाव, दृष्टि और नक्षत्र से ही निकलता है। मिथुन में योगकारक ग्रह भी नहीं है।

आर्द्रा के चारों पाद मिथुन में हैं और आर्द्रा का स्वामी राहु है — अठारह वर्ष की दशा, विंशोत्तरी की तीसरी सबसे लंबी। शेष पाँच पाद पुनर्वसु के गुरु (16 वर्ष) और मृगशिरा के मंगल (7 वर्ष) में बँटे हैं। तुला और कुंभ भी इसी तिकड़ी से आरंभ करते हैं।

इस राशि के नक्षत्र — गण, योनि और नाड़ी

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी गण योनि नाड़ी
मृगशिरामंगलदेवसर्पमध्य
आर्द्राराहुमनुष्यश्वानआदि
पुनर्वसुगुरुदेवमार्जारआदि

इस राशि में जन्म से कौन-सी महादशा पहले चलती है

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी महादशा वर्ष राशि का भाग
मृगशिरामंगल7 वर्ष2/9 · 6°40′
आर्द्राराहु18 वर्ष4/9 · 13°20′
पुनर्वसुगुरु16 वर्ष3/9 · 10°00′

यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: तुला · कुम्भ

कार्य और करियर

बुध — राशि स्वामी

बुध संवाद और विनिमय का कारक है। मिथुन चंद्र उस काम में सहज है जहाँ सूचना का आदान-प्रदान हो, और उस काम में थकता है जहाँ एक ही क्रिया लंबे समय तक दोहरानी पड़े — यह क्षमता का प्रश्न नहीं, स्वभाव का है।

धन और व्यय

चंद्रमा — मिथुन से द्वितीयेश (कर्क)

मिथुन से दूसरा भाव कर्क है, चंद्रमा का। धन-भाव पर मन के कारक का स्वामित्व होने से मिथुन चंद्र के खर्च भावनात्मक स्थिति के साथ घटते-बढ़ते हैं। बजट बनाना यहाँ अनुशासन नहीं, आत्म-रक्षा है।

संबंध

गुरु — मिथुन से सप्तमेश (धनु)

मिथुन से सातवाँ भाव धनु है, गुरु की राशि। मिथुन चंद्र संबंध में जानकारी नहीं, अर्थ खोजता है — विपरीत राशि गुरु की होने से यहाँ आकर्षण प्रायः उस व्यक्ति की ओर होता है जिसके पास दृष्टि हो, केवल तथ्य नहीं।

स्वास्थ्य

बुध और मिथुन का बाहु-स्थान

कालपुरुष में मिथुन कंधे, बाहु और श्वास-नलिका का स्थान है। मिथुन चंद्र में तनाव कंधों में और साँस की लय में उतरता है। श्वास को धीमा करने वाला कोई भी अभ्यास इस राशि के लिए विशेष रूप से काम करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिथुन राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

मृगशिरा के तीसरे और चौथे पाद, आर्द्रा के चारों पाद, और पुनर्वसु के पहले तीन पाद — कुल नौ। पुनर्वसु का चौथा पाद कर्क में जाता है, इसलिए पुनर्वसु में जन्मे सब लोग मिथुन राशि के नहीं होते।

क्या मिथुन राशि वालों का मन नहीं टिकता?

मिथुन द्विस्वभाव राशि है, और द्विस्वभाव का अर्थ है परिवर्तनशीलता — पर वह अस्थिरता नहीं, अनुकूलन है। मन कितना टिकेगा यह चंद्रमा के नक्षत्र और उस पर पड़ने वाली दृष्टियों से तय होता है, केवल राशि से नहीं।

मिथुन और वृषभ दोनों में मृगशिरा आती है — अंतर क्या है?

पाद का अंतर है। मृगशिरा के पहले दो पाद वृषभ में हैं और अंतिम दो मिथुन में। एक ही नक्षत्र होने पर भी राशि-स्वामी बदल जाता है — वृषभ में शुक्र, मिथुन में बुध — इसलिए फल भिन्न होता है।

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