The direct answer: मेष राशिफल आज का — चंद्र राशि मेष: मेष राशिफल — 0° से 30° निरयन तक की चंद्र राशि। मंगल स्वामी, सूर्य 10 अंश पर उच्च, शनि 20 अंश पर नीच। अश्विनी, भरणी और कृत्तिका के पाद सहित। AskSoma publishes this at asksoma.ai/hi/rashifal/mesh as a free Vedic astrology resource using Swiss Ephemeris calculations and classical Jyotish interpretation — not generic sun-sign copy.
मेष राशिफल — 0° से 30° निरयन तक की चंद्र राशि। मंगल स्वामी, सूर्य 10 अंश पर उच्च, शनि 20 अंश पर नीच। अश्विनी, भरणी और कृत्तिका के पाद सहित।
मेष राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 0° से 30° निरयन के बीच था। मेष का स्वामी मंगल है, सूर्य यहाँ 10 अंश पर उच्च का होता है और शनि 20 अंश पर नीच का — बारह राशियों में यही एक संयोजन मेष को मिला है।
मेष चर (movable) राशि है और अग्नि तत्व की, और इसका नवांश क्रम स्वयं मेष से आरंभ होता है — चर राशियों का यही नियम है। व्यावहारिक अर्थ यह कि मेष के नौ पाद नवांश में मेष से कन्या तक सीधी पंक्ति में चलते हैं, बिना किसी छलाँग के; यह क्रम बारह राशियों में केवल चार को मिलता है।
मेष चंद्र का स्वभाव उसके स्वामी से पढ़ा जाता है, और मंगल की विशेषता गति है, दिशा नहीं। इसलिए मेष चंद्र की प्रतिक्रिया तेज़ होती है और वही उसकी शक्ति भी है और सीमा भी — निर्णय जल्दी बनता है, पर उसे बदलने में भी उतनी ही तेज़ी रहती है। शनि का यहाँ नीच होना इसी बात का शास्त्रीय रूप है: जो गुण शनि देता है — प्रतीक्षा, क्रम, धीरज — वह मेष में सबसे कम सहज है।
सूर्य का 10 अंश मेष पर उच्च होना इस राशि की दूसरी संरचनात्मक बात है। जिनका चंद्रमा मेष में है, उनके लिए आत्म-प्रतिष्ठा का प्रश्न सामान्य से अधिक भारी पड़ता है — मन जिस राशि में है, उसमें आत्मा का कारक अपने शिखर पर बैठता है। यह अहंकार नहीं है; यह स्वयं को सिद्ध करने की आवश्यकता है, जो मेष चंद्र में मन की मूल गति बन जाती है।
| नक्षत्र | पाद | सायन अंश | नक्षत्र स्वामी | नवांश |
|---|---|---|---|---|
| अश्विनी | 1 | 0°00′ – 3°20′ | केतु | मेष |
| अश्विनी | 2 | 3°20′ – 6°40′ | केतु | वृषभ |
| अश्विनी | 3 | 6°40′ – 10°00′ | केतु | मिथुन |
| अश्विनी | 4 | 10°00′ – 13°20′ | केतु | कर्क |
| भरणी | 1 | 13°20′ – 16°40′ | शुक्र | सिंह |
| भरणी | 2 | 16°40′ – 20°00′ | शुक्र | कन्या |
| भरणी | 3 | 20°00′ – 23°20′ | शुक्र | तुला |
| भरणी | 4 | 23°20′ – 26°40′ | शुक्र | वृश्चिक |
| कृत्तिका | 1 | 26°40′ – 30°00′ | सूर्य | धनु |
| भाव | राशि | राशि स्वामी | किसका भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | मेष | मंगल | तन, स्वभाव, देह |
| 2 | वृषभ | शुक्र | धन, कुटुम्ब, वाणी |
| 3 | मिथुन | बुध | पराक्रम, भाई-बहन, साहस |
| 4 | कर्क | चंद्र | सुख, माता, घर |
| 5 | सिंह | सूर्य | विद्या, संतान, बुद्धि |
| 6 | कन्या | बुध | रोग, ऋण, शत्रु |
| 7 | तुला | शुक्र | दाम्पत्य, साझेदारी |
| 8 | वृश्चिक | मंगल | आयु, गुप्त, आकस्मिक |
| 9 | धनु | गुरु | भाग्य, धर्म, पिता |
| 10 | मकर | शनि | कर्म, प्रतिष्ठा |
| 11 | कुम्भ | शनि | लाभ, इच्छा-पूर्ति |
| 12 | मीन | गुरु | व्यय, विदेश, मोक्ष |
| ग्रह | भाव |
|---|---|
| सूर्य | 5 |
| चंद्र | 4 |
| मंगल | 1 · 8 |
| बुध | 3 · 6 |
| गुरु | 9 · 12 |
| शुक्र | 2 · 7 |
| शनि | 10 · 11 |
मेष से बारह भावों में शुक्र के पास दूसरा और सातवाँ दोनों हैं — धन और दाम्पत्य एक ही ग्रह के अधीन। शनि के पास दसवाँ और ग्यारहवाँ, यानी कर्म और लाभ एक ही सूत्र में बँधे; मेष चंद्र के लिए आजीविका और आमदनी अलग-अलग प्रश्न नहीं रहते। बुध तीसरे और छठे का स्वामी है — पराक्रम और ऋण, दोनों संवाद पर टिके हैं।
मेष उन छह राशियों में है जिनमें एक ग्रह उच्च और दूसरा नीच, दोनों बैठते हैं: सूर्य 10 अंश पर उच्च, शनि 20 अंश पर नीच। विशेष बात यह कि दोनों बिंदु ठीक वहीं पड़ते हैं जहाँ से एक पाद आरंभ होता है — सूर्य का बिंदु अश्विनी के चौथे पाद का द्वार है (पाद स्वामी केतु), शनि का भरणी के तीसरे का (स्वामी शुक्र)। मेष और तुला, केवल यही दो राशियाँ ऐसी हैं। मेष में कोई योगकारक ग्रह नहीं है।
नौ पादों में चार अश्विनी के हैं, चार भरणी के, और केवल एक कृत्तिका का — इसलिए मेष चंद्र का जीवन प्रायः केतु या शुक्र की महादशा से खुलता है, सूर्य से बहुत कम। लंबाई भी असमान है: 7, 20 और 6 वर्ष। सिंह और धनु में यही तीन स्वामी लौट आते हैं, नक्षत्र बदलकर।
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | गण | योनि | नाड़ी |
|---|---|---|---|---|
| अश्विनी | केतु | देव | अश्व | आदि |
| भरणी | शुक्र | मनुष्य | गज | मध्य |
| कृत्तिका | सूर्य | राक्षस | मेष | अन्त्य |
| ग्रह | स्थिति | राशि में अंश | कौन-से पाद में |
|---|---|---|---|
| सूर्य | उच्च | 10°00′ | अश्विनी पाद 4 · केतु · ठीक इसी अंश से वह पाद आरंभ होता है |
| शनि | नीच | 20°00′ | भरणी पाद 3 · शुक्र · ठीक इसी अंश से वह पाद आरंभ होता है |
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | महादशा वर्ष | राशि का भाग |
|---|---|---|---|
| अश्विनी | केतु | 7 वर्ष | 4/9 · 13°20′ |
| भरणी | शुक्र | 20 वर्ष | 4/9 · 13°20′ |
| कृत्तिका | सूर्य | 6 वर्ष | 1/9 · 3°20′ |
यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: सिंह · धनु
मंगल — राशि स्वामी
मंगल कर्म का कारक है, इसलिए मेष चंद्र के लिए काम आरंभ करना सरल और पूरा करना कठिन रहता है। जिस दिन गोचर का मंगल पीड़ित हो, नया काम शुरू करने के बजाय अधूरा काम समाप्त करना अधिक फलदायी होता है।
शुक्र — मेष से द्वितीयेश (वृषभ)
मेष से दूसरा भाव वृषभ है, जिसका स्वामी शुक्र है — अर्थात् मेष चंद्र के धन-भाव का नियंत्रण मंगल के नहीं, शुक्र के हाथ है। खर्च प्रायः तात्कालिक इच्छा से होता है, आवश्यकता से नहीं; यही इस राशि की सबसे बार-बार दोहराई जाने वाली आर्थिक चूक है।
शुक्र — मेष से सप्तमेश (तुला)
मेष से सातवाँ भाव तुला है — मेष की ठीक विपरीत राशि, और शुक्र की। संबंधों में मेष चंद्र को वही चाहिए जो उसके स्वभाव में सबसे कम है: संतुलन और प्रतीक्षा। यही कारण है कि मेष चंद्र प्रायः अपने से धीमे स्वभाव वाले साथी की ओर खिंचता है।
मंगल और मेष का शिर-स्थान
कालपुरुष में मेष सिर का स्थान है, और मंगल पित्त तथा रक्त का कारक। मेष चंद्र में तनाव सबसे पहले सिर में उतरता है — सिरदर्द, नींद की कमी, जबड़े का भिंचना। नींद का समय ठीक रखना इस राशि के लिए सामान्य सलाह नहीं, विशिष्ट उपाय है।
मंगल। मेष मंगल की मूल त्रिकोण राशि नहीं है (वह भी मेष ही है, 0° से 12° तक) — मंगल यहाँ स्वगृही है, इसलिए मेष चंद्र वालों के लिए मंगल की स्थिति सामान्य से अधिक महत्व रखती है।
अश्विनी के चारों पाद, भरणी के चारों पाद, और कृत्तिका का पहला पाद — कुल नौ पाद। कृत्तिका के शेष तीन पाद वृषभ में चले जाते हैं, इसीलिए कृत्तिका में जन्मे सब लोग एक राशि के नहीं होते।
यह मंगल का सरलीकरण है। मंगल क्रोध नहीं, वेग देता है — प्रतिक्रिया की तेज़ी। वह क्रोध बनेगा या निर्णय-क्षमता, यह मंगल की भाव-स्थिति और दृष्टि से तय होता है, जो केवल राशि से नहीं जानी जा सकती।
मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन
English: Mesh rashifal · Mesh rashi in English · rashi compatibility
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गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से · समीक्षा तिथि 2026-08-07
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Written by Savan Vyas, founder of AskSoma.
The astrology is not written from memory: every chart position, dasha period and panchang timing AskSoma shows is computed with the Swiss Ephemeris on the Lahiri (Chitrapaksha) ayanamsa. How we calculate.