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मीन राशिफल — 330° से 360° निरयन तक की चंद्र राशि। गुरु स्वामी, शुक्र 27 अंश पर उच्च, बुध 15 अंश पर नीच। पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती सहित।
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मीन राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 330° से 360° निरयन के बीच था। मीन का स्वामी गुरु है, शुक्र यहाँ 27 अंश पर उच्च का होता है और बुध 15 अंश पर नीच का — यह राशि-चक्र की अंतिम राशि है और रेवती के अंत पर चक्र पूरा होता है।
मीन की व्याख्या इसके स्थान से आरंभ होती है। यह बारहवीं राशि है, और कालपुरुष में बारहवाँ भाव विसर्जन तथा मोक्ष का है। इसलिए मीन चंद्र का मन सीमाओं को उतनी स्पष्टता से नहीं पकड़ता जितनी अन्य राशियाँ — अपना और पराया अनुभव आपस में मिल जाते हैं। यह भ्रम नहीं, इस स्थान का स्वभाव है।
बुध का यहाँ नीच होना इसी बात का शास्त्रीय रूप है। बुध विभाजन और वर्गीकरण का कारक है — यह और वह अलग करने की शक्ति — और मीन में वही शक्ति सबसे कम सहज है। इसके ठीक विपरीत शुक्र यहाँ 27 अंश पर उच्च का है, अर्थात् जो ग्रह प्रेम और स्वीकार का कारक है वह इस राशि में अपने शिखर पर बैठता है।
मीन द्विस्वभाव राशि है, इसलिए नवांश क्रम पाँचवें स्थान से आरंभ होता है — कर्क से। मीन के नौ पाद नवांश में कर्क से आरंभ होकर मीन पर समाप्त होते हैं, जल से जल तक। कर्क और वृश्चिक की तरह मीन को भी पूर्ण जल-वृत्त मिला है, और तीनों जल राशियों में यही अंतिम है — इसीलिए शास्त्र इसे संचित अनुभव की राशि कहता है।
| नक्षत्र | पाद | सायन अंश | नक्षत्र स्वामी | नवांश |
|---|---|---|---|---|
| पूर्व भाद्रपद | 4 | 330°00′ – 333°20′ | गुरु | कर्क |
| उत्तर भाद्रपद | 1 | 333°20′ – 336°40′ | शनि | सिंह |
| उत्तर भाद्रपद | 2 | 336°40′ – 340°00′ | शनि | कन्या |
| उत्तर भाद्रपद | 3 | 340°00′ – 343°20′ | शनि | तुला |
| उत्तर भाद्रपद | 4 | 343°20′ – 346°40′ | शनि | वृश्चिक |
| रेवती | 1 | 346°40′ – 350°00′ | बुध | धनु |
| रेवती | 2 | 350°00′ – 353°20′ | बुध | मकर |
| रेवती | 3 | 353°20′ – 356°40′ | बुध | कुम्भ |
| रेवती | 4 | 356°40′ – 360°00′ | बुध | मीन |
| भाव | राशि | राशि स्वामी | किसका भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | मीन | गुरु | तन, स्वभाव, देह |
| 2 | मेष | मंगल | धन, कुटुम्ब, वाणी |
| 3 | वृषभ | शुक्र | पराक्रम, भाई-बहन, साहस |
| 4 | मिथुन | बुध | सुख, माता, घर |
| 5 | कर्क | चंद्र | विद्या, संतान, बुद्धि |
| 6 | सिंह | सूर्य | रोग, ऋण, शत्रु |
| 7 | कन्या | बुध | दाम्पत्य, साझेदारी |
| 8 | तुला | शुक्र | आयु, गुप्त, आकस्मिक |
| 9 | वृश्चिक | मंगल | भाग्य, धर्म, पिता |
| 10 | धनु | गुरु | कर्म, प्रतिष्ठा |
| 11 | मकर | शनि | लाभ, इच्छा-पूर्ति |
| 12 | कुम्भ | शनि | व्यय, विदेश, मोक्ष |
| ग्रह | भाव |
|---|---|
| सूर्य | 6 |
| चंद्र | 5 |
| मंगल | 2 · 9 |
| बुध | 4 · 7 |
| गुरु | 1 · 10 |
| शुक्र | 3 · 8 |
| शनि | 11 · 12 |
मीन से लग्न और दशम दोनों गुरु के पास हैं — कन्या के अलावा यह केवल मीन को मिला है। शनि के पास एकादश और द्वादश, यानी लाभ और व्यय एक ही स्वामी के; मंगल के पास द्वितीय और नवम। मीन में कोई योगकारक ग्रह नहीं है।
मीन में शुक्र 27 अंश पर उच्च होता है, और वह बिंदु रेवती के चौथे पाद में पड़ता है — पाद स्वामी बुध। उसी राशि में बुध 15 अंश पर नीच होता है, उत्तर भाद्रपद के चौथे पाद में, स्वामी शनि। यही कन्या का दर्पण है: वहाँ बुध उच्च और शुक्र नीच, यहाँ ठीक उलटा।
रेवती के चारों पाद मीन में हैं — बुध की सत्रह वर्ष की महादशा। रेवती नक्षत्र-चक्र का अंतिम नक्षत्र है, इसलिए मीन के अंतिम 13°20′ में जन्म पूरे 108-पाद चक्र के अंत पर पड़ता है। उत्तर भाद्रपद के चार पाद शनि (19 वर्ष) देते हैं, पूर्व भाद्रपद का एक गुरु (16 वर्ष)। कर्क और वृश्चिक भी यही तीन पाते हैं।
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | गण | योनि | नाड़ी |
|---|---|---|---|---|
| पूर्व भाद्रपद | गुरु | मनुष्य | सिंह | आदि |
| उत्तर भाद्रपद | शनि | मनुष्य | गौ | मध्य |
| रेवती | बुध | देव | गज | अन्त्य |
| ग्रह | स्थिति | राशि में अंश | कौन-से पाद में |
|---|---|---|---|
| बुध | नीच | 15°00′ | उत्तर भाद्रपद पाद 4 · शनि |
| शुक्र | उच्च | 27°00′ | रेवती पाद 4 · बुध |
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | महादशा वर्ष | राशि का भाग |
|---|---|---|---|
| पूर्व भाद्रपद | गुरु | 16 वर्ष | 1/9 · 3°20′ |
| उत्तर भाद्रपद | शनि | 19 वर्ष | 4/9 · 13°20′ |
| रेवती | बुध | 17 वर्ष | 4/9 · 13°20′ |
यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: कर्क · वृश्चिक
गुरु — राशि स्वामी
गुरु अर्थ का कारक है और बुध यहाँ नीच का। मीन चंद्र उस काम में असाधारण है जिसमें कल्पना या सेवा हो, और उस काम में थकता है जिसमें बारीक वर्गीकरण और कठोर समय-सीमा हो — यह क्षमता का नहीं, संरचना का प्रश्न है।
मंगल — मीन से द्वितीयेश (मेष)
मीन से दूसरा भाव मेष है, मंगल का। सबसे कोमल राशि का धन-भाव सबसे वेगवान ग्रह के हाथ में होने से खर्च प्रायः आवेग में होता है, और आय तब बेहतर बनती है जब कोई और उसका हिसाब रखे।
बुध — मीन से सप्तमेश (कन्या)
मीन से सातवाँ भाव कन्या है, बुध की राशि और उसका उच्च स्थान। जिस राशि में बुध नीच का है उसके ठीक सामने वह उच्च का है — इसीलिए मीन चंद्र प्रायः उस व्यक्ति की ओर खिंचता है जो व्यावहारिक स्पष्टता ला सके।
गुरु और मीन का पाद-स्थान
कालपुरुष में मीन पैरों और लसीका-तंत्र का स्थान है। मीन चंद्र में थकान पैरों में और नींद की गुणवत्ता में उतरती है — नींद का समय नियमित रखना इस राशि के लिए विशिष्ट संकेत है, सामान्य सलाह नहीं।
पूर्व भाद्रपद का चौथा पाद, उत्तर भाद्रपद के चारों पाद, और रेवती के चारों पाद — कुल नौ। रेवती के साथ राशि-चक्र पूरा होता है, इसलिए उसके अंतिम अंश को गांडांत कहा गया है।
शास्त्रीय मत के अनुसार बुध मीन के 15 अंश पर परम नीच है — कन्या के अपने उच्च स्थान से ठीक सामने। कारण यह कि बुध विभाजन का कारक है और मीन विसर्जन की राशि, जहाँ सीमाएँ घुल जाती हैं।
मीन बारहवीं राशि है और उसका स्वभाव सीमाओं को कम स्पष्ट रखता है, इसलिए दूसरों का अनुभव सहज ही भीतर आ जाता है। वह भावुकता कहलाएगी या करुणा, यह चंद्रमा की भाव-स्थिति और उस पर पड़ने वाली दृष्टियों से तय होता है।
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