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कुम्भ राशिफल आज का — चंद्र राशि कुम्भ

कुम्भ राशिफल — 300° से 330° निरयन तक की चंद्र राशि। शनि स्वामी, स्थिर वायु राशि। धनिष्ठा, शतभिषा और पूर्व भाद्रपद के पाद सहित।

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कुम्भ राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 300° से 330° निरयन के बीच था। कुम्भ का स्वामी शनि है और यह स्थिर वायु राशि है — शनि की दो राशियों में यही वह है जो पृथ्वी की नहीं, वायु की है, और यही अंतर पूरी व्याख्या बदल देता है।

राशि स्वामी
शनि
तत्व
वायु
निरयन विस्तार
300°00′ – 330°00′

मकर और कुम्भ दोनों का स्वामी शनि है, पर मकर में शनि पदार्थ पर काम करता है और कुम्भ में विचार पर। इसलिए कुम्भ चंद्र का अनुशासन समय और श्रम का नहीं, दृष्टिकोण का होता है — एक बार कोई बात समझ में बैठ गई तो वह सहज नहीं हिलती। स्थिर राशि होना इस दृढ़ता को और बढ़ा देता है।

कुम्भ स्थिर राशि है, इसलिए नवांश क्रम नवें स्थान से आरंभ होता है — तुला से। कुम्भ के नौ पाद नवांश में तुला से आरंभ होकर मिथुन पर समाप्त होते हैं, वायु से वायु तक। तुला के वायु-वृत्त की तरह यह भी पूर्ण वायु-वृत्त है, पर अंतर यह कि तुला चर है और कुम्भ स्थिर — यहाँ विचार बदलता नहीं, गहरा होता है।

कुम्भ में शतभिषा पूरी आती है और उसका स्वामी राहु है। शनि की राशि में राहु का नक्षत्र — शास्त्र में दोनों को छाया और सीमा से जोड़ा गया है, और शतभिषा को "सौ वैद्य" का नक्षत्र कहा गया है। कुम्भ के मध्य चार पादों पर बनने वाला यह शनि-राहु संयोजन किसी अन्य राशि में इस रूप में नहीं आता, और यही कुम्भ की उस प्रवृत्ति का आधार है जो भीड़ से अलग खड़ी रहती है।

इस राशि के नौ पाद — नक्षत्र, अंश और नवांश

नक्षत्र पाद सायन अंश नक्षत्र स्वामी नवांश
धनिष्ठा3300°00′ – 303°20′मंगलतुला
धनिष्ठा4303°20′ – 306°40′मंगलवृश्चिक
शतभिषा1306°40′ – 310°00′राहुधनु
शतभिषा2310°00′ – 313°20′राहुमकर
शतभिषा3313°20′ – 316°40′राहुकुम्भ
शतभिषा4316°40′ – 320°00′राहुमीन
पूर्व भाद्रपद1320°00′ – 323°20′गुरुमेष
पूर्व भाद्रपद2323°20′ – 326°40′गुरुवृषभ
पूर्व भाद्रपद3326°40′ – 330°00′गुरुमिथुन

इस राशि से बारह भाव — राशि और भावेश

भाव राशि राशि स्वामी किसका भाव
1कुम्भशनितन, स्वभाव, देह
2मीनगुरुधन, कुटुम्ब, वाणी
3मेषमंगलपराक्रम, भाई-बहन, साहस
4वृषभशुक्रसुख, माता, घर
5मिथुनबुधविद्या, संतान, बुद्धि
6कर्कचंद्ररोग, ऋण, शत्रु
7सिंहसूर्यदाम्पत्य, साझेदारी
8कन्याबुधआयु, गुप्त, आकस्मिक
9तुलाशुक्रभाग्य, धर्म, पिता
10वृश्चिकमंगलकर्म, प्रतिष्ठा
11धनुगुरुलाभ, इच्छा-पूर्ति
12मकरशनिव्यय, विदेश, मोक्ष

किस ग्रह के पास कौन-से भाव

ग्रहभाव
सूर्य7
चंद्र6
मंगल3 · 10
बुध5 · 8
गुरु2 · 11
शुक्र4 · 9
शनि1 · 12

योगकारक ग्रह: शुक्र — 4 · 9

कुंभ से चतुर्थ और नवम दोनों शुक्र के पास हैं — केंद्र और त्रिकोण — इसलिए शुक्र कुंभ का योगकारक है। शनि स्वयं लग्न और व्यय भाव दोनों का स्वामी है: कुंभ चंद्र के लिए स्वभाव और त्याग एक ही ग्रह से पढ़े जाते हैं। बुध के पास पंचम और अष्टम।

कुंभ में किसी ग्रह का उच्च या नीच अंश नहीं है। शनि यहाँ स्वगृही है, पर उसका उच्च तुला में 20 अंश पर पड़ता है — और तुला कुंभ से नवम भाव है, यानी शनि का शिखर कुंभ चंद्र के भाग्य-भाव में बैठता है। राशि से नहीं, भाव और नक्षत्र से ही यहाँ शनि का बल निकलता है।

शतभिषा के चारों पाद कुंभ में हैं और उसका स्वामी राहु है, इसलिए अठारह वर्ष की महादशा यहाँ का सबसे आम आरंभ बनती है। पूर्व भाद्रपद के तीन पाद गुरु (16 वर्ष) और धनिष्ठा के दो मंगल (7 वर्ष) देते हैं। मिथुन और तुला में भी यही तीन स्वामी हैं।

इस राशि के नक्षत्र — गण, योनि और नाड़ी

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी गण योनि नाड़ी
धनिष्ठामंगलराक्षससिंहमध्य
शतभिषाराहुराक्षसअश्वआदि
पूर्व भाद्रपदगुरुमनुष्यसिंहआदि

इस राशि में जन्म से कौन-सी महादशा पहले चलती है

नक्षत्र नक्षत्र स्वामी महादशा वर्ष राशि का भाग
धनिष्ठामंगल7 वर्ष2/9 · 6°40′
शतभिषाराहु18 वर्ष4/9 · 13°20′
पूर्व भाद्रपदगुरु16 वर्ष3/9 · 10°00′

यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: मिथुन · तुला

कार्य और करियर

शनि — राशि स्वामी, वायु राशि में

कुम्भ चंद्र उस काम में सर्वोत्तम है जहाँ व्यवस्था बनानी हो — नियम, ढाँचा, प्रणाली — और उस काम में अटकता है जहाँ केवल आदेश का पालन करना हो। शनि यहाँ अनुशासन देता है, आज्ञाकारिता नहीं।

धन और व्यय

गुरु — कुम्भ से द्वितीयेश (मीन)

कुम्भ से दूसरा भाव मीन है, गुरु का। धन-भाव पर सबसे उदार ग्रह होने से आय के स्रोत प्रायः अपेक्षित मार्ग से नहीं आते; कठिनाई कमाने की नहीं, अनियमित आय को व्यवस्थित रखने की होती है।

संबंध

सूर्य — कुम्भ से सप्तमेश (सिंह)

कुम्भ से सातवाँ भाव सिंह है, सूर्य की राशि। शनि और सूर्य की परस्पर विरोधी प्रकृति संबंधों की मूल संरचना बनाती है — कुम्भ चंद्र दूरी बनाकर चलता है, पर खिंचाव प्रायः उस व्यक्ति की ओर होता है जो गर्मजोशी से भरा हो।

स्वास्थ्य

शनि और कुम्भ का जंघा-स्थान

कालपुरुष में कुम्भ पिंडली, टखने और रक्त-संचार का स्थान है। कुम्भ चंद्र में तनाव पिंडलियों और रक्त-संचार पर उतरता है — लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना इस राशि के लिए विशेष रूप से भारी पड़ता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुम्भ राशि का स्वामी शनि है या राहु?

शास्त्रीय स्वामी शनि है। कुछ परंपराएँ राहु को कुम्भ का सह-स्वामी मानती हैं, जैसे वृश्चिक के लिए केतु को — पर पराशर पद्धति की मूल गणना शनि से चलती है।

कुम्भ राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

धनिष्ठा के तीसरे और चौथे पाद, शतभिषा के चारों पाद, और पूर्व भाद्रपद के पहले तीन पाद — कुल नौ। पूर्व भाद्रपद का चौथा पाद मीन में जाता है।

मकर और कुम्भ दोनों का स्वामी शनि है — फल में अंतर क्या है?

तत्व का अंतर है। मकर पृथ्वी तत्व की चर राशि है, कुम्भ वायु तत्व की स्थिर। मकर में शनि ठोस परिणाम पर काम करता है, कुम्भ में विचार और व्यवस्था पर — इसलिए एक ही स्वामी होने पर भी दोनों का स्वभाव भिन्न है।

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