The direct answer: तुला राशिफल आज का — चंद्र राशि तुला: तुला राशिफल — 180° से 210° निरयन तक की चंद्र राशि। शुक्र स्वामी, शनि 20 अंश पर उच्च, सूर्य 10 अंश पर नीच। चित्रा, स्वाति और विशाखा सहित। AskSoma publishes this at asksoma.ai/hi/rashifal/tula as a free Vedic astrology resource using Swiss Ephemeris calculations and classical Jyotish interpretation — not generic sun-sign copy.
तुला राशिफल — 180° से 210° निरयन तक की चंद्र राशि। शुक्र स्वामी, शनि 20 अंश पर उच्च, सूर्य 10 अंश पर नीच। चित्रा, स्वाति और विशाखा सहित।
तुला राशिफल उनके लिए है जिनका चंद्रमा जन्म के समय 180° से 210° निरयन के बीच था। तुला का स्वामी शुक्र है, शनि यहाँ 20 अंश पर उच्च का होता है और सूर्य 10 अंश पर नीच का — यही एक राशि है जहाँ शनि अपने शिखर पर और सूर्य अपने निम्नतम पर एक साथ मिलते हैं।
तुला की पूरी व्याख्या इसी एक तथ्य से निकलती है। जिस राशि में सूर्य नीच का हो, वहाँ आत्म-केंद्रित निर्णय स्वाभाविक नहीं होता; और जिस राशि में शनि उच्च का हो, वहाँ न्याय, संतुलन और दूसरे का पक्ष देखना सहज होता है। तुला चंद्र का मन इसलिए स्वयं से आरंभ नहीं करता — वह संबंध से आरंभ करता है, और यही उसकी शक्ति भी है और उसकी कीमत भी।
तुला चर राशि है और वायु तत्व की, इसलिए नवांश क्रम स्वयं तुला से आरंभ होता है और मिथुन पर समाप्त — वायु से वायु तक। कर्क के जल-वृत्त, मेष के अग्नि-आरंभ की तरह यह पूर्ण वायु-वृत्त तुला की विशेषता है: विचार से आरंभ, विचार पर अंत, और बीच में संतुलन बनाए रखने का सतत प्रयास।
तुला में स्वाति पूरी आती है और उसका स्वामी राहु है। तुला के मध्य चार पाद ऐसे हैं जहाँ राशि-स्वामी शुक्र और नक्षत्र-स्वामी राहु है। स्वाति को शास्त्र में स्वतंत्र वायु का नक्षत्र कहा गया है — जो बिना बंधन के चलती है — और शुक्र के संतुलन के साथ राहु की यह स्वतंत्रता तुला के अतिरिक्त कहीं नहीं बनती।
| नक्षत्र | पाद | सायन अंश | नक्षत्र स्वामी | नवांश |
|---|---|---|---|---|
| चित्रा | 3 | 180°00′ – 183°20′ | मंगल | तुला |
| चित्रा | 4 | 183°20′ – 186°40′ | मंगल | वृश्चिक |
| स्वाति | 1 | 186°40′ – 190°00′ | राहु | धनु |
| स्वाति | 2 | 190°00′ – 193°20′ | राहु | मकर |
| स्वाति | 3 | 193°20′ – 196°40′ | राहु | कुम्भ |
| स्वाति | 4 | 196°40′ – 200°00′ | राहु | मीन |
| विशाखा | 1 | 200°00′ – 203°20′ | गुरु | मेष |
| विशाखा | 2 | 203°20′ – 206°40′ | गुरु | वृषभ |
| विशाखा | 3 | 206°40′ – 210°00′ | गुरु | मिथुन |
| भाव | राशि | राशि स्वामी | किसका भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | तुला | शुक्र | तन, स्वभाव, देह |
| 2 | वृश्चिक | मंगल | धन, कुटुम्ब, वाणी |
| 3 | धनु | गुरु | पराक्रम, भाई-बहन, साहस |
| 4 | मकर | शनि | सुख, माता, घर |
| 5 | कुम्भ | शनि | विद्या, संतान, बुद्धि |
| 6 | मीन | गुरु | रोग, ऋण, शत्रु |
| 7 | मेष | मंगल | दाम्पत्य, साझेदारी |
| 8 | वृषभ | शुक्र | आयु, गुप्त, आकस्मिक |
| 9 | मिथुन | बुध | भाग्य, धर्म, पिता |
| 10 | कर्क | चंद्र | कर्म, प्रतिष्ठा |
| 11 | सिंह | सूर्य | लाभ, इच्छा-पूर्ति |
| 12 | कन्या | बुध | व्यय, विदेश, मोक्ष |
| ग्रह | भाव |
|---|---|
| सूर्य | 11 |
| चंद्र | 10 |
| मंगल | 2 · 7 |
| बुध | 9 · 12 |
| गुरु | 3 · 6 |
| शुक्र | 1 · 8 |
| शनि | 4 · 5 |
योगकारक ग्रह: शनि — 4 · 5
तुला से चतुर्थ और पंचम दोनों शनि के पास हैं — केंद्र और त्रिकोण — इसलिए शनि तुला का योगकारक है, और यही शनि इसी राशि में 20 अंश पर उच्च भी होता है। बारह राशियों में केवल तुला को यह मिला है कि उसका योगकारक उसी राशि में अपने शिखर पर बैठे। मंगल के पास द्वितीय और सप्तम — धन और दाम्पत्य एक ही ग्रह से।
उसी तुला में सूर्य 10 अंश पर नीच होता है। दोनों बिंदु ठीक वहीं पड़ते हैं जहाँ से एक पाद आरंभ होता है — सूर्य का स्वाति के दूसरे पाद का द्वार है (पाद स्वामी राहु), शनि का विशाखा के पहले का (स्वामी गुरु)। मेष और तुला, केवल यही दो राशियाँ ऐसी हैं, और दोनों में वही सूर्य-शनि की जोड़ी है, बस उलटी।
स्वाति के चारों पाद तुला में हैं, इसलिए राहु की अठारह वर्ष की महादशा यहाँ सबसे आम आरंभ है। विशाखा के तीन पाद गुरु (16 वर्ष) देते हैं और चित्रा के दो मंगल (7 वर्ष)। मिथुन और कुंभ इसी क्रम को साझा करते हैं।
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | गण | योनि | नाड़ी |
|---|---|---|---|---|
| चित्रा | मंगल | राक्षस | व्याघ्र | मध्य |
| स्वाति | राहु | देव | महिष | अन्त्य |
| विशाखा | गुरु | राक्षस | व्याघ्र | अन्त्य |
| ग्रह | स्थिति | राशि में अंश | कौन-से पाद में |
|---|---|---|---|
| सूर्य | नीच | 10°00′ | स्वाति पाद 2 · राहु · ठीक इसी अंश से वह पाद आरंभ होता है |
| शनि | उच्च | 20°00′ | विशाखा पाद 1 · गुरु · ठीक इसी अंश से वह पाद आरंभ होता है |
| नक्षत्र | नक्षत्र स्वामी | महादशा वर्ष | राशि का भाग |
|---|---|---|---|
| चित्रा | मंगल | 7 वर्ष | 2/9 · 6°40′ |
| स्वाति | राहु | 18 वर्ष | 4/9 · 13°20′ |
| विशाखा | गुरु | 16 वर्ष | 3/9 · 10°00′ |
यही तीन आरंभिक महादशाएँ इन राशियों को भी मिलती हैं: मिथुन · कुम्भ
शुक्र — राशि स्वामी
शुक्र सामंजस्य का कारक है। तुला चंद्र वहाँ अच्छा करता है जहाँ लोगों के बीच काम बनाना हो, और वहाँ अटकता है जहाँ किसी एक पक्ष को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना पड़े — निर्णय की कठिनाई क्षमता की नहीं, संरचना की है।
मंगल — तुला से द्वितीयेश (वृश्चिक)
तुला से दूसरा भाव वृश्चिक है, मंगल का। शुक्र की राशि का धन-भाव मंगल के हाथ में होने से आय और व्यय दोनों में उतार-चढ़ाव रहता है — स्थिर आय की अपेक्षा यहाँ प्रायः पूरी नहीं होती।
मंगल — तुला से सप्तमेश (मेष)
तुला से सातवाँ भाव मेष है, मंगल की राशि, जहाँ सूर्य उच्च का होता है। जिस राशि में सूर्य नीच का है उसके ठीक सामने वह उच्च का है — इसीलिए तुला चंद्र प्रायः उस व्यक्ति की ओर खिंचता है जो निर्णय लेने में हिचकता नहीं।
शुक्र और तुला का कटि-स्थान
कालपुरुष में तुला कटि, वृक्क और मूत्र-तंत्र का स्थान है। तुला चंद्र में असंतुलन कमर के निचले हिस्से और जल-संतुलन पर उतरता है — पर्याप्त जल और बैठने की मुद्रा इस राशि के लिए विशिष्ट संकेत हैं।
शास्त्रीय मत के अनुसार सूर्य तुला के 10 अंश पर परम नीच है — मेष के अपने उच्च स्थान से ठीक सामने। कारण यह बताया जाता है कि तुला संतुलन और समझौते की राशि है, और सूर्य का स्वभाव एकल अधिकार का, जो यहाँ सहज नहीं बैठता।
चित्रा के तीसरे और चौथे पाद, स्वाति के चारों पाद, और विशाखा के पहले तीन पाद — कुल नौ। चित्रा के पहले दो पाद कन्या में और विशाखा का चौथा पाद वृश्चिक में पड़ता है।
तुला में शनि उच्च का है, इसलिए हर पक्ष तौलने की प्रवृत्ति स्वाभाविक है — यह अनिर्णय नहीं, प्रक्रिया है। कठिनाई तब बनती है जब निर्णय की कोई समय-सीमा न हो; सीमा तय कर देना इस राशि के लिए वास्तविक उपाय है।
मेष · वृषभ · मिथुन · कर्क · सिंह · कन्या · तुला · वृश्चिक · धनु · मकर · कुम्भ · मीन
English: Tula rashifal · Tula rashi in English · rashi compatibility
अपनी राशि नहीं — अपनी कुंडली देखिए
गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिड़ी अयनांश से · समीक्षा तिथि 2026-08-07
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Written by Savan Vyas, founder of AskSoma.
The astrology is not written from memory: every chart position, dasha period and panchang timing AskSoma shows is computed with the Swiss Ephemeris on the Lahiri (Chitrapaksha) ayanamsa. How we calculate.